मुख्य पृष्ठ » XXX कहानी » चूत चटवाकर चटनी बनवाई


चूत चटवाकर चटनी बनवाई

Posted on:- 2022-10-22


नमस्कार साथियों.. मेरा नाम नंदिनी है.. मेरी उम्र 30 साल है और में शादीशुदा हूँ. मेरे पति का नाम महेश है और वो एक प्राईवेट कम्पनी में प्रॉजेक्ट मैंनेजर है. में और मेरे पति महेश एकदम खुले विचारों के है और उन्हें मुझे बहुत ही सेक्सी ड्रेस में देखना और दिखाना बहुत पसंद करता है. हमारे शादी के तीन साल हो गये और हमारी सेक्स लाईफ बहुत ही अच्छी है. हम एक दिन में तीन, चार बार सेक्स करते है.. लेकिन में तो बताना ही भूल गयी थी कि मेरे फिगर का साईज 34-30-34 है और में हर टाईम बहुत ही सेक्सी कपड़े पहनती हूँ और मुझे अपना शरीर सभी लोगो को दिखाना बहुत अच्छा लगता है. मित्रों ये कहानी आप देशीअडल्टस्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं.

 

साथियों यह उस समय की बात है.. जब महेश कम्पनी के किसी जरूरी काम के सिलसिले में 35 दिन के लिए दुबई गये हुए थे और में उन दिनों घर पर बहुत ही अकेली हो गयी थी और में चुदाई के लिए बहुत तड़प रही थी.. मेरी चूत में जैसे आग सी लगी हुई थी. मुझे अब कैसे भी अपनी चूत की आग ठंडी करनी थी. तो रोज रात को महेश से मेरा नेट पर चेट होता था और हम दोनों नंगे पूरे होकर चेट करते थे.. लेकिन चेट करने से भी मुझे सन्तुष्टि नहीं थी और मेरी चूत दिनों दिन और बेकाबू होती जा रही थी. में सेक्स के लिए पूरी तरह से पागल हो चुकी थी और अपनी चूत में उगलियाँ करके चूत का सारा पानी निकालकर दिन गुजर रही थी.

 

इसके बाद उस टाईम हमारे पड़ोस में एक फेमिली रहने के लिए आई.. उस फेमिली में पति, पत्नी और उनका एक 20 सक का लड़का था. इसके बाद धीरे धीरे मुझे मालूम पड़ा कि उनका जो लड़का है उसका थोड़ा दिमाग़ ठीक नहीं है और उसका शरीर तो 20 साल का है.. लेकिन उसका दिमाग़ 10 साल के लड़के जैसा है और वो लोग इस बात से बहुत परेशान रहते थे. तो कुछ दिनों में मेरी उनसे बहुत अच्छी दोस्ती हो गयी और वो जो औरत थी वो बहुत ही अच्छी थी. इसके बाद में अपने रोज के पहनावे की तरह उसके सामने भी छोटे छोटे कपड़े पहनती थी और उनको कोई प्राब्लम नहीं थी. हमारी दोस्ती बहुत ही अच्छी हो गयी और इसके बाद एक दिन अचानक ही वो औरत मेरे पास आई और मुझसे बोली कि उनको भी एक अच्छी नौकरी मिल गयी है और यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है.. क्योंकि मैंने ही उस औरत को नौकरी करने की सलाह दी थी और इसके बाद वो कहने लगी कि अब तुम्हे मेरा एक और काम करना पड़ेगा.. क्या तुम मेरे लड़के को सम्भाल सकती हो? तो मैंने थोड़ी देर सोचा और में भी राज़ी हो गयी.

 

तो एक हफ्ते के बाद उसने नौकरी पर जाना शुरू कर दिया और वो अपने पागल लड़के को मेरा पास देखभाल करने के लिए छोड़ गयी. एक दो दिन में मुझसे उस लड़के की दोस्ती होने लगी.. लेकिन वो वैसे बिल्कुल ही पागल था. में उसके सामने भी हर रोज की तरह सेक्सी कपड़े पहनती थी. तो एक दिन अचानक वो मुझे बोला कि आंटी आप मम्मी जैसी क्यों नहीं रहती? तो मैंने उससे पूछा कि तुम्हारी मम्मी कैसे रहती है क्या पहनती है?

 

रजत : ( उसका नाम रजत था ) मेरी मम्मी घर में हमेशा गाऊन पहनती है.. लेकिन आप तो बच्ची जैसी छोटी स्कर्ट पहनती हो.

 

में : हाँ में इसलिए यह सभी पहनती हूँ.. क्योंकि अभी गर्मी का टाईम है और मुझे बहुत गर्मी लगती है.. इसी वजह से में छोटी छोटी कपड़े पहनती हूँ.. क्यों तुम्हे यह सभी कपड़े अच्छे नहीं लगते?

 

रजत : नहीं मुझे बहुत अच्छा लगता है और आप इन सभी कपड़ो में बहुत सुंदर लगती हो.

 

इसके बाद ऐसे ही कुछ दिन बीत गये में देख रही थी कि वो मुझे बहुत घूरता था और में भी उसे उतना ही चाहने करने लगी थी. एक दिन उसकी मम्मी हर दिन की तरह उसको मेरे पास छोड़कर ऑफिस चली गयी तो वो रोने लगा. में उसके पास जाकर उसका सर अपने सीने पर लेकर सहलाने लगी और उससे पूछने लगी कि तुम क्यों रो रहे हो?

 

रजत : मम्मी मुझे प्यार नहीं करती है.. वो सिर्फ़ पापा को प्यार करती है.

 

में : तुम ऐसा क्यों कह रहे हो?

 

रजत : क्योंकि मैंने कल रात को देखा कि मम्मी, पापा को बहुत प्यार कर रही थी.

 

में : लेकिन वो कैसे?

 

रजत : पापा ने मम्मी को बहुत देर तक चूम रही थी और उसके बाद मम्मी के सारे कपड़े उतार दिए और मम्मी ने पापा को अपना दूध पिलाया.. लेकिन सुबह जब मैंने मम्मी से कहा कि मुझे भी प्यार करो और मुझे भी अपना दूध पिलाओ तो उसने मुझे ज़ोर से थप्पड़ मारा और मुझे दूध भी नहीं पिलाया.

 

तो में समझ गयी कि वो अभी भी बिल्कुल बच्चा ही है और बिल्कुल पागल है और उसको दूध भी पीना है और में भी सेक्स के लिए बहुत तड़प रही थी और इसके बाद मैंने भी सोच लिया कि उसको में अपनी जरूरत बनाऊंगी और सेक्स का मज़ा लूँगी.

 

में : कोई बात नहीं.. में तुम्हे बहुत प्यार करूंगी और दूध भी पिलाऊंगी.

 

तो मैंने उसको अपने सीने से लगा लिया और उसके बाल सहलाने लगी उसके मुहं मेरे बूब्स पर दब रहे थे. मुझे जोश चड़ रहा था और वो एकदम चुपचाप मेरे बूब्स के ऊपर सर रखकर लेटा था.. में उसको चूमने लगी तो उसने पूछा कि आंटी यह क्या कर रहे हो?

 

में : क्यों तुमको प्यार कर रही हूँ.. क्या तुम को अच्छा नहीं लगा?

 

रजत : हाँ मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मुझे और प्यार करो.

 

तो में उसको और चूमने लगी और मैंने धीरे से उसके लंड को छू दिया.. उसका लंड बहुत बड़ा था.

 

रजत : आंटी आज में नहाया नहीं हूँ.. क्या आप मुझे नहला दोगे?

 

इसके बाद में भी यह मौका छोड़ना नहीं चाहती थी.. क्योंकि में भी यह चाहती थी कि और इसके बाद मैंने बोला कि ठीक है चलो आज में तुम्हे नहलाती हूँ.

 

में : तुम बाथरूम में जाओ में चेंज करके आती हूँ.

 

तो वो बाथरूम में चली गई और मैंने अपनी ड्रेस उतार कर एक टावल लपेट लिया और बाथरूम में गयी. इसके बाद जब में बाथरूम में घुसी तो देखी कि वो सिर्फ़ अंडरवियर में खड़ा था. मैंने उसको पानी से भिगोया और साबुन लगाकर मसलने लगी. तभी अचानक उसने मुझसे पूछा कि तुम टावल में क्यों हो?

 

में : अगर में तुम्हे कपड़े पहनकर नहलाऊँगी तो मेरे भी कपड़े गीली हो जाएगे.

 

रजत : तो तुम भी मम्मी कि तरह ब्रा और पेंटी पहन लो.

 

में : क्या तुम्हारी माँ तुम को ब्रा और पेंटी पहन कर नहलाती है?

 

रजत : हाँ और कभी कभी तो वो ब्रा भी नहीं पहनती.

 

मुझे सेक्स चड़ने लगा और में बोली कि ठीक है.. तुम थोड़ा और रूको में दोबारा से चेंज करके आती हूँ. तो मेरी निप्पल टाईट होने लगी और मैंने बाहर आकर एक सफेद कलर की ब्रा और पेंटी पहन ली और इसके बाद से बाथरूम में चली गयी. वो अब भी वैसे ही खड़ा था तो में उसको साबुन लगाने लगी और चिपकने लगी.. मेरा और उसका बदन एक दूसरे से घिसने लगे में पूरी गीली हो चुकी थी.. मेरी ब्रा और पेंटी पारदर्शी हो चुके थे. तभी उसने अचानक से अपनी अंडरवियर को उतार दिया और कहने लगा कि थोड़ा इसको भी साबुन लगा दो.

 

में : क्या मम्मी तुम्हारे साथ ऐसा भी करती है?

 

रजत : हाँ मम्मी मेरे पूरे बदन को साबुन लगाकर अच्छे से साफ करती है.

 

तो में भी उसकी गांड और लंड में साबुन लगाकर रगड़ने लगी और इसके बाद थोड़ी ही देर में उसका लंड खड़ा होने लगा.

 

में : तुम यह क्या हो रहा है?

 

रजत : मालूम नहीं आंटी.. लेकिन ऐसा तो रोज होता है.. आप भी नहा लो इसके बाद एक साथ बाहर जाएँगे.

 

तो में भी नहाने लगी और जितना सेक्सी पोज़ हो सकता है देने लगी और बोली कि तुम भी मुझे साबुन लगा दो. इसके बाद उसने साबुन लिया और मेरे सारे बदन को लगाने लगा.. मेरे बूब्स के ऊपर, मेरी गांड में साबुन लगाया और बोला कि आंटी तुम्हारे दूध कितनी अच्छे है.. में तो इनको देखकर पागल हो रहा हूँ इसके बाद उसने मेरे पेंटी के अंदर हाथ डाला और बोला कि आंटी तुम्हारे पास तो मेरे जैसा नहीं है.

 

में : नहीं बेटा.. लडकियों को वैसा नहीं होता.. रजत अब तुम बाहर जाओ में अभी आती हूँ. तो वो बाहर चला गया और में नहाकर टावल लपेटकर बाहर आई और मैंने बेडरूम में आकर देखा तो वो अभी भी नंगा बैठा था.

 

रजत : आंटी में क्या पहनूं? मेरी तो अंडरवियर पूरी गीली हो गई है.

 

में : कोई बात नहीं.. तुम ऐसे ही रहो.. में तुम्हे कुछ पहनने के लिए देती हूँ.

 

तो उसके बाद मैंने उसको मेरी एक मिनी स्कर्ट दी और बोली कि तुम इसको पहन लो. तो उसने वो मिनी स्कर्ट पहन ली और में भी चेंज करने लगी मैंने एक लाल कलर की ब्रा और पेंटी पहनी और ऊपर एक पारदर्शी गाऊन पहना वो गाऊन बहुत ही छोटा था और उससे सिर्फ मेरी गांड ढक रही थी.. तब तक मैंने मन बना लिया था कि कैसे भी मुझे उससे चुदवाना है. उसका लंड बहुत बड़ा था और मोटा भी था. इसके बाद हम दोनों ने एक साथ लंच किया और बेड पर सोने के लिए गये. उसने मेरी स्कर्ट पहनी था और उसका लंड साफ साफ दिख रहा था. इसके बाद मैंने अपना गाऊन उतार दिया और सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में बिस्तर पर लेट गयी और उसको बोली कि आओ आज में तुम्हे प्यार करती हूँ.. वो मेरे पास आ गया और में उसको बहुत चूमने लगी और उसका लंड सहलाने लगी.

 

रजत : क्या आंटी मुझे दूध पिलाओगे?

 

में : क्यों नहीं बेटा आओ अभी पिलाती हूँ?

 

में कुछ करने से पहले ही उसने मेरी चूची को दबाया और ब्रा से बाहर कर दिया. इसके बाद चूची से खेलने लगा. में पागल हो रही थी और मैंने अपनी ब्रा उतार दी.. अब में सिर्फ़ पेंटी मे थी.

 

इसके बाद वो मेरे बूब्स को मुहं में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा. में भी पागलों की तरह उसके लंड को ऊपर नीचे करने लगी. तो थोड़ी ही देर बाद वो झड़ गया और में पूरी गीली हो चुकी थी.

 

रजत : आंटी यह क्या हो रहा है?

 

में : कुछ नहीं बेटा ज़्यादा प्यार करने से ऐसा ही होता है.

 

रजत : ठीक है आंटी. इसके बाद से वो मेरे बूब्स को चूसने लगा और दबाने लगा.

 

में : रजत आओ में तुम्हे और प्यार करना सिखाती हूँ.

 

रजत : ठीक है आंटी.

 

इसके बाद मैंने रजत को पूरा नंगा कर दिया और अपनी भी पेंटी उतार दी.

 

रजत : आंटी आप बिल्कुल मम्मी जैसी लग रही हो.. मम्मी भी ऐसे ही पापा को प्यार करती है.

 

में : हाँ में जानती हूँ.. अब से रोज हम दोनों ऐसे ही रहेंगे और बहुत प्यार करेंगे.

 

रजत : ठीक है आंटी अब में क्या करूँ?

 

में : तुमने आज मेरा बहुत दूध पी लिया.. अब तुम अपना मुहं मेरी चूत में ले जाओ और चूत का रस पियो.

 

रजत : ठीक है आंटी.

 

तो रजत मेरी चूत चाटने लगा और में पागल हो रही थी मैंने एक बार पानी भी छोड़ दिया था.

 

में : आओ रजत अब हम एक दूसरे को प्यार करें.

 

रजत : आंटी वो कैसे?

 

में : तुम मेरी चूत का रस पियो और में तुम्हारे लंड का रस पीती हूँ.

 

रजत : आंटी ठीक है.

 

हम दोनों 69 पोज़िशन में आ गये और एक दूसरे को बहुत चूसने लगे.. वो मेरी चूत में अपनी जीभ घुसा घुसाकर जोर जोर से चूसने लगा और कहने लगा कि आंटी आपके छेद से नमकीन नमकीन पानी निकल रहा है तो में कहने लगी कि रजत चूसो और जोर से चूसो यह पानी तुम्हारे लिए ही है तो वो और जोर से चूसने लगा और अपनी ऊँगली चूत में डालकर उँगलियाँ चाटने लगा. इसके बाद करीब आधे घंटे के बाद हम दोनों एक एक करके झड़ गये. उसको बहुत मज़ा आ रहा था और इसके बाद मैंने भी उसका लंड करीब बीस मिनट तक चूसा और बहुत मजे किए और हम एक दूसरे को बाहों में लेकर नंगे ही सो गये.. लेकिन बीच में जब भी उसकी नींद खुली तो वो मेरे बूब्स को मुहं में लेकर चूसने लगा.. बिल्कुल एक छोटे बच्चे की तरह और इसके बाद से रोज सुबह उसके आते ही हम दोनों नंगे हो जाते थे और साथ में सेक्स गेम खेलते थे. एक दिन मैंने उसको बोला कि आज तुम मुझे वैसे ही प्यार करोगे जैसे तुम्हारे पापा तुम्हारी मम्मी को प्यार करते है.

 

रजत : वो कैसे?

 

में : बताती हूँ

 

इसके बाद मैंने उसके लंड को चूस चूसकर खड़ा कर दिया और बोली कि अब तुम इसको मेरी भोसड़े के अंदर डाल दो और अंदर बाहर करो और वो इसको नया खेल समझ कर जोश के साथ तैयार हो गया और मुझे चोदने लगा. उसका लंड बहुत ज़्यादा बड़ा था और उसने मुझे करीब 11 मिनट तक चोदा और इसके बाद झड़ गया. तो मुझे बहुत आनंद मिलने लगा था और में उससे अलग अलग पोज़ में चुदवाती रही और वो इसको प्यार का गेम समझकर खेलता रहा. तब से हम दोनों घर में हमेशा ही नंगे रहने लगे और मेरे पति आने तक हम लोग रोज 2-3 बार सेक्स करते रहे. अब वो मेरी जरूरत बन चुका था और उसको में जैसे चाहे इस्तमाल करती थी. हम हर जगह पर और अलग अलग तरीके से कभी रसोई में, कभी बाथरूम में, कभी सोफे पर, कभी बालकनी में भी सेक्स किया और यह करीब एक महीने तक चला. वो मेरे लिए इतना पागल था कि जब भी उसका लंड खड़ा होता था वो मुझे चोद देता था. इसके बाद उसने बहुत बार चुदाई की.

What did you think of this story??






अन्तर्वासना इमेल क्लब के सदस्य बनें


हर सप्ताह अपने मेल बॉक्स में मुफ्त में कहानी प्राप्त करें! निम्न बॉक्स में अपना इमेल आईडी लिखें, फिर ‘सदस्य बनें’ बटन पर क्लिक करें !


* आपके द्वारा दी गयी जानकारी गोपनीय रहेगी, किसी से कभी साझा नहीं की जायेगी।