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कोई नहीं तो काम वाली ही सही

Posted on:- 2022-09-03


नमस्कार मेरे मित्रगणों  और सुनाइए कैसे आप सब . में आपका मित्र  राहुल एक बार फिर से आ गया हूँ एक नई कहानी लेकर और में आज आपको बताता हूँ कि कैसे मैंने अपनी कामवाली  को चोदा. अब में अपनी स्टोरी शुरू करता हूँ.. लेकिन दोस्तों इससे पहले में आपको बता दूँ कि मैंने एम.बीए किया हुआ है और में अभी कोटा  में नौकरी करता हूँ. में एक किराये का माकन में रहता हूँ और मेरे घर पर काम करने के लिए मैंने एक बाई रखी हुई है. मेरी उम्र अभी 26 साल है और यह बात कुछ ही दिन पहले की है. मोटी गांड वाली लड़कियों की बात ही कुछ और है.


 क्या गजब चुदकड़ अंदाज थी मेरी मौसी भी कोटा  में रहती है तो मैंने उनकी बेटी को बहुत बार चोदा था.. लेकिन अब उसकी शादी हो गई है और मेरी भाभी अपने पति के साथ अमेरिका जा चुकी है. तो यह तो हुआ मेरा पुराना हिसाब किताब.. अब में आप लोगों को वो बताता हूँ जो मैंने नया किया है. जैसा कि मैंने बताया कि में घर पर अकेला रहता हूँ तो मैंने घर में सभी काम के लिए एक बाई लगा रखी है वो घर की सफाई भी करती है और खाना भी बनाती है.. उसकी उम्र लगभग 25 साल है और वो सुंदर बहुत थी. मतलब उसको देख ऐसा नहीं लगता था कि उसे कामवाली  होना चाहिए. उसका सावलां सा रंग था.. ठीक ठाक हाईट और सुडौल बदन, उसका फिगर रहा होगा 37-26-34 और वो शादीशुदा थी. में हर पल यही सोचता कि उसका पति कितना किस्मत वाला है और वो साला इसको बहुत चोदता होगा. उसके चूचिया  दिखने में ऐसे थे कि बस दबा ही डालो और ब्लाउज में समाते ही नहीं थे. वो कितना भी साड़ी से ढकती वो इधर उधर से ब्लाउज से उभरते और उसकी चूचियाँ दिख ही जाती थी. फिर जब झाडू लगाते हुए वो झुकती तो ब्लाउज के ऊपर से चूचियों के बीच की दरार को छुपा ना सकती थी. मेरे मित्रगणों  क्या मॉल थी उसकी चुची पीकर मजा आ गया.


 मै एक नंबर का आवारा चोदा पेली करने वाला  लड़का हु मुझे लड़किया चोदना अच्छा लगता है फिर एक दिन जब मैंने उसकी इस दरार को तिरछी नज़र से देखा तो मुझे पता लगा कि उसने सफेद कलर की ब्रा पहनी हुई थी और जब वो ठुमकती हुई चलती तो उसके चूतड़ हिलते और जैसे वो कह रहे हो कि मुझे पकड़ो और दबा दो. फिर वो जब. अपनी पतली सी कॉटन की साड़ी जब वो संभालती हुई सामने अपनी चूत पर हाथ रखती तो मेरा मन करता कि काश उसकी चूत को में छू सकता और करारी, गरम, फूली हुई और गीली गीली चूत में कितना मज़ा भरा हुआ था? काश में इसे चूम सकता और चूचियों को चूस सकता और इसकी चूत को चूसकर चूत का पानी खाली कर देता. वो हर रोज 2 बार मेरे घर पर आया करती थी और सुबह जब में ऑफिस जाने को तैयार रहता था.. तब वो आती और मेरे पूरे दिल में हलचल कर जाती. फिर में उसको देखता और नहाते टाईम उसके बारे में सोचकर मुठ मारा करता था. जब तक मुझे अपनी बहन और भाभी की चूत मिल रही थी तब तक मैंने उसको इस नज़र से नहीं देखा था.. लेकिन अब मुझे 3-4 महीनों से कोई चोदने को नहीं मिला था तो मेरी नज़र उस पर जा रही थी. वो तो मुझे देखती ही नहीं थी.. बस अपने काम से मतलब रखती और ठुमकती हुई चली जाती और मैंने भी उसे कभी ऐसा एहसास नहीं होने दिया कि मेरी नज़र उसे चोदने के लिए बैताब है और अब चोदना तो था ही. मेरे प्यारे दोस्तो चुची पिने का मजा ही कुछ और है.


 ये कहानी पढ़ कर आपका लंड खड़ा नहीं हुआ तो बताना  लड खड़ा ही हो जायेगा  तो मैंने अब सोच लिया कि इसे पटाना ही होगा और धीरे धीरे मेरी तरफ आकर्षित करना पड़ेगा.. वरना कहीं वो बुरा मान गई तो मेरा सारा काम बिगड़ जाएगा. तो मैंने उससे थोड़ी थोड़ी बातें करना शुरू किया.. उसका नाम विपसना  था. एक दिन सुबह उससे बात करते करते मैंने उससे उसके घरवालो के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसके पति नौकरी पर है और वो गुडगाँव में रहते है.. उसके एक 2 साल की लड़की है और फिर वो चली गई. फिर कुछ दिन तक में ऐसे ही उससे बात करता रहा और हम दोनों की दूरियां कम कर रहा था और अब करीब करीब रोज़ में चाय बनवाता और उसकी बड़ाई करता. फिर मैंने एक दिन ऑफिस जाने के पहले अपनी शर्ट प्रेस करवाई और उसको बोला कि विपसना  तुम प्रेस अच्छी तरह कर लेती हो. तो उसने कहा कि साहब मुझे दो दिन की छुट्टी चाहिए मेरे वो आ रहे है. फिर मैंने उसी बात पर उससे कहा कि मतलब अब तो सिर्फ़ तुम और वो और दरवाजा बंद करके रखना.. तो वो बोली कि क्या साहब आप भी? फिर मैंने उसको 500 रुपये दिए और कहा कि जाओ.. लेकिन दो दिन से ज्यादा मत लगाना.. तो वो बहुत खुश हो गई और चली गई. मेरे मित्रगणों  चुत छोड़ने के बाद सुस्ती सी आ जाती है    .


क्या बताऊ मेरे मित्रगणों   उसको देखकर किसी लैंड टाइट हो जाये मेरे मित्रगणों  मने बहुत सी भाभियाँ चोद राखी है फिर जब वो दो दिन के बाद काम पर आई तो वो बहुत खुश लग रही थी और में जब शाम को घर आया तो मैंने उससे पूछा कि क्यों मिल आई क्या अपने पति से.. कैसे है वो? कितने कमा कर लाया था और क्या क्या किया तुम लोगों ने. तो वो कहने लगी कि साहब मेरे वो तो बहुत अच्छे है वो बहुत सारे पैसे लाए थे और हमने बहुत मज़े भी  मेरे मित्रगणों  क्या मलाई वाला माल लग रहा था     किये और बात करते करते में हमेशा उसके चूचिया  देखता और उसकी गांड देखता.. वो मुझे कई बार देख लेती और फिर वहाँ से जाने लगती और ऐसे ही बातों का सिलसिला चलता रहा. फिर एक दिन मैंने उससे ऐसे ही कहा कि तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो और अगर तुम्हारी शादी नहीं हुई होती तो में तुमसे शादी कर लेता. तो वो कुछ नहीं बोली.. मैंने धीरे से अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया और उससे कहा कि मेरे पास आकर बैठो.. लेकिन उसने मना कर दिया और बोली कि साहब में अभी चलती हूँ. तो मैंने उससे कहा कि तुम जा रही हो तो चली जाओ.. लेकिन ज़रा सोचकर बताना. चुदाई की कहानी जरूर सुनना चाहिए मजे के लिए.


 साथियो की पुराणी मॉल छोड़ने का मजा ही कुछ और है फिर शाम को जब वो आई तो उसने घर का काम किया और चली गई.. मुझे ऐसा लगा कि वो शायद नाराज़ हो गई है तो उसके लिए एक सिंपल सी साड़ी लेकर आया और जब वो दूसरे दिन आई तो मैंने उससे चाय लेते समय उसको वो साड़ी दे दी और मैंने उससे कहा कि तुम मुझे ग़लत मत समझो शांती.. तुम मुझे सच में बहुत अच्छी लगती हो और में तुम्हे बहुत पसंद करता हूँ. तो वो शरमाते हुए चली गई और किचन में जाकर खाना बनाने लग गई. फिर मैंने 3 दिन बाद ऑफिस से 2 दिन की छुट्टी लेने का फ़ैसला किया और मैंने सोच लिया कि इसको इन्ही 3 दिन में सेट करना पड़ेगा.. लेकिन 2 दिन चोदना है और जब वो दूसरे दिन आई.. तो मैंने उससे कहा कि सुनो शांती तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो और में तुमको बहुत सारा प्यार देना चाहता हूँ.. मैंने तुमको जब से देखा है में पागल सा हो गया हूँ और मेरा दिल चाहता है कि में तुमको दिन रात प्यार करता रहूँ. तभी वो यह बात सुनकर नाराज़ सी हो गई और वो कहने लगी कि साहब मैंने यह कभी नहीं सोचा था कि आप मेरे बारे में ऐसा सोचते होंगे.. में जा रही हूँ और अब कभी नहीं आउंगी और आप सब मर्द एक जैसे होते है. अब सुनिए चुदाई की असली कहानी.


 मेरे मित्रगणों  एक बार चोदते  चोदते  मेरा लंड घिस गया फिर मैंने उससे कहा कि विपसना  तुम ग़लत समझ रही हो में तुमको बहुत खुश रखूँगा और तुम मेरा साथ दो तो में तुमको इतने पैसे दूँगा कि तुमको कहीं और काम भी करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.. लेकिन वो बिल्कुल भी मानने को तैयार ही नहीं थी. फिर मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसको अपनी और खींचने लगा और वो मुझसे दूर जाने की नाकाम कोशिश करती रही. फिर मैंने उसको ज़ोर से पकड़कर अपनी गोद में बैठा लिया और मैंने उससे कहा कि तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो विपसना .. प्लीज़ समझो मेरी बात को. मेरा कोई ग़लत इरादा नहीं है प्लीज़.. शांती और उसको ज़बरदस्ती पकड़कर दबाने लगा. फिर मैंने उसके चूचिया  को  वहा का माहौल बहुत अच्छा था  मेरे मित्रगणों   दबाना शुरू कर दिया और उसकी साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा. तभी इतने में ही शांती बोली कि साहब में आपसे एक ही शर्त पर सब कुछ करने को तैयार हो जाउंगी. तो मैंने पूछा कि कौन सी शर्त? तो वो बोली कि आप मुझ पर कभी कोई भी ज़बरदस्ती नहीं करेंगे और कभी किसी से कहेंगे नहीं तो.. फिर मैंने कहा कि में पागल हूँ क्या.. जो किसी से कहूँगा कि मैंने तुम्हारे साथ कुछ किया है? तो वो बोली कि फिर ठीक है और फिर वो धीरे से बोली कि साहब प्यासी तो में भी बहुत समय से हूँ और मेरी भी आपके ऊपर पिछले 3-4 महीने से नज़र है.. लेकिन मेरी हिम्मत नहीं होती थी कि में आपसे कैसे कहूँ? और आज आपने ही कह दिया है तो मेरी भी परेशानी खत्म हो गई है. मेरे मित्रगणों  उस लड़की मैंने चुत का खून निकल दिया.


वहा जबरजस्त माल भी थी मेरे मित्रगणों   विपसना  आज का काम पूरा कर चुकी थी और मेरा भी ऑफिस जाने का टाईम हो चुका था तो में भी तैयार हो गया और मैंने उससे कहा कि आज शाम को मिलना. तो वो बोली कि ठीक है साहब और वहाँ से चली गई. फिर में भी तैयार हो गया और जब शाम को वो आई.. तो मैंने उसे अपने साथ बैठाकर दोनों दिन की बात की मैंने उससे कहा कि तुम दो दिन के लिए मेरे ही घर पर रुक जाओ ताकि हम अच्छे से काम कर सके. तो उसने बहुत देर नाटक करने के बाद बोली कि ठीक है साहब और फिर मैंने अपना हाथ उसके चूचिया  पर रख दिया और उसके चूचिया  को दबाने लग गया और वो मेरा हाथ छुड़ाने लगी.. लेकिन में करीब 2-3 मिनट तक उसके चूचिया  दबाता रहा. मेरे मित्रगणों  चोदते चोदते चुत का भोसड़ा बन गया.


 ऐसे माहौल कौन नहीं रहना चाहेगा मेरे मित्रगणों   फिर मैंने उससे कहा कि में आज तुमको कपड़े दिलवाने चलता हूँ तो वो बहुत खुश हो गई. मैंने उससे कहा कि तुम अच्छे से मेरे घर पर नहा लो और तब तक मैंने उसके लिए एक हरी साड़ी निकाल ली जो मैंने भाभी को दिलाई थी उनको चोदने के लिए और फिर जब वो बाहर आई.. तब मैंने उसको वो साड़ी पहनने को दी और वो वहां पर सिर्फ़ ब्रा पेंटी में बाहर आई थी और जैसे ही वो बाहर आई.. तो मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके चूचिया  दबा दिए और उसकी पेंटी के ऊपर से उसकी चूत को दबाने लग गया. फिर मैंने उसकी ब्रा को खोल दिया और उसके चूचिया  को चूसने लगा वो भी एकदम मदहोश हो गई और फिर बोली कि साहब अभी रहने दो मुझे आज घर भी जाना है और पता नहीं आप खरीदारी में कितनी देर लगाओगे है? तो मैंने कहा कि ठीक है. फिर हम लोग मेरे घर से साथ में निकले और मैंने एक ऑटो किया और हम दोनों लेडीस मार्केट में गए.. मैंने वहां पर उसको न्यू ब्रा पेंटी, मेक्सी और साड़ी के दो दो सेट दिला दिए और फिर वहीं पर बाहर से मैंने उसको शेम्पू और टूथब्रश और मेरे मित्रगणों  एक बार मैंने अपने गांव के लड़की जबरजस्ती चोद दिया.
पेस्ट भी दिला दिया और फिर मैंने उससे कहा कि चलो अब तुम अपने घर पर चली जाओ और में भी वो सब सामान लेकर अपने घर पर आ गया और मैंने रास्ते में एक मेडिकल पर रुककर केप्सूल और कन्डोम ले लिया. उह क्या मॉल था मेरे मित्रगणों  गजब .

ओह्ह उसके यह का चुम्बन की तो बात अलग है अब की बार क्या नरम होंठ थे मानो शराब के प्याले हों. मैंने होठों को चूसना शुरू किया और उसने भी जवाब देना शुरू किया. उसके दोनों हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे और में उसके गुलाबी होठों को बहुत ज़ोर ज़ोर से चूस चूसकर मज़ा ले रहा था. तभी मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूचियाँ जो कि तन गयी थी.. मेरे सीने पर दब रही हैं और बाएँ हाथ से में उसकी पीठ को अपनी तरफ दबा रहा था.. जीभ से उसकी जीभ और होठों को चूस रहा था और दाएँ हाथ से मैंने उसकी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया. फिर मेरा हाथ अपने आप उसकी दाईं चूची पर चला गया और उसे मैंने ज़ोर से दबाया. वाह क्या चूचिया  थे? मलाई थे बस मलाई और अब मेरा . एक बार मैंने अपने मौसी की लड़की को जबरजस्ती चोद दिया लंड फूँकारे मार रहा था. तो बाएँ हाथ से मैंने उसके चूतड़ को अपनी तरफ दबाया और उसे अपने लंड को महसूस करवाया.. दोस्तों शादीशुदा लड़की को चोदना बहुत आसान होता है क्योंकि उन्हे सब कुछ आता है और बिल्कुल भी घबराती नहीं हैं. फिर ब्रा तो उसने पहनी ही नहीं थी और ब्लाउज के बटन पीछे थे. मैंने अपने हाथों से उन्हे खोल दिया और ब्लाउज को उतार फेंका दोनों चूचिया  जैसे क़ैद थे एकदम उछलकर हाथों में आ गए.. एकदम सख्त.. लेकिन मलाई की तरह प्यारे भी. तो मैंने साड़ी को खोला और उतार फेंका बस अब बचा भी क्या था? वो खड़ी नहीं हो पा रही थी और में उसे हल्के हल्के खीचते हुए अपने बेडरूम में ले आया और लेटा दिया और अब मैंने कहा कि विपसना  रानी अब तुम आँखें खोल सकती हो. है उसके गांड मेरा मतलब तरबूज क्या गजब भाई.


 मेरे मित्रो मामा की लड़की की चुदाई में बड़ा मजा आया तो वो शरमाते हुए बोली कि आप बहुत पाजी है साहब और उसने आँखें खोली और फिर बंद कर ली.. तो मैंने झट से अपने कपड़े उतारे और नंगा हो गया और मेरा लंड पहले से ही तनकर उछल रहा था.. मैंने उसका पेटीकोट जल्दी से खोला और खींचकर उतार दिया. तभी मैंने देखा कि उसने कोई पेंटी नहीं पहनी हुई थी और मैंने उसे बात करने के लिए कहा कि यह क्या तुम्हारी चूत तो नंगी है? क्या तुम पेंटी नहीं पहनती? तो उसने शरमाते हुए कहा कि नहीं साहब.. सिर्फ़ एम.सी में पहनती हूँ और साहब पर्दे खींचकर बंद करो ना.. बहुत रोशनी है. तो मैंने झट से पर्दों को बंद किया जिससे थोड़ा अंधेरा हो गया और उसके ऊपर लेट गया.. उसके होठों को कसकर चूमा.. दोनों हाथों से चूचियाँ दबाई और एक हाथ को उसकी चूत पर घुमाया तो उसकी चूत पर छोटे छोटे बाल बहुत अच्छे लग रहे थे और थोड़ा सा नीचे आते हुए उसके चूचिया  को मुँह में ले लिया. वाह क्या रस था? लेकिन बस मज़ा बहुत आ रहा था. अपनी एक उंगली को उसकी चूत की दरार पर घुमाया और फिर उसकी चूत में घुसाया. उंगली ऐसे घुसी जैसे मक्खन में छुरी.. चूत गरम और गीली थी और उसकी सिसकियाँ मुझे और भी मस्त कर रही थी. मेरे मित्रगणों  कई बार जबरजस्ती शॉट मरने में चुत से खून निकल गया.

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