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वो लड़की नहीं रंडी थी

Posted on:- 2022-07-18


नमस्कार साथियों, सेक्स कहानी बहुत साल पहले की हैं जब हम लोग कोलेज के फायनल इयर में थे. मैं और मेरा दोस्त पूरन जिसकी यह कहानी हैं. पूरन के मकान के सामने एक बहुत बड़ी कोठी थी जिसमे एक बिजनेशमेन रहता था. वो अपनी बीवी और बेटी के साथ रहता था. उसकी बेटी की उम्र करीब 20 साल की होंगी. जब भी मैं पूरन को मिलने जाता तो यह लड़की घर के ऊपर के मजले से हमें देखती थी. इस लड़की का कमरा पूरन के मकान के बिलकुल सामने ही पड़ता था. उसके बाप के डर से पहले पहले हम उसकी और ध्यान नहीं देते थे.

 

पूरन ने फिर मुझे इस माँ बेटी के बारे में बताया. पूरन के मुताबिक़ उस लड़की का नाम कल्याणी था और उसकी माँ का नाम राबिया था. एक दिन पूरन ने कल्याणी की माँ को गाडी में कही जाते देखा, वो गाडी में बैठी थी और कल्याणी घर के मेन गेट के पास खड़ी थी. कल्याणी को उसकी माँ कह रही थी की 4-5 दिन पढने के लिए मत जाना और अपने अब्बू के खाने का ध्यान रखना. घर में अकेली हो तब दरवाजे को बंध ही रखना.

 

दुसरे दिन पूरन के माता पिता कहीं बहार गये थे और वो अपने किचन में मेगी बना रहा था. तभी उसके घर की घंटी बजी. उसने दरवाजा खोला तो सामने कल्याणी खड़ी थी.

 

जी, मेरा नाम कल्याणी हैं हम आप के नए पडोसी हैं. मेरी माँ बहार गई हैं और मुझे थोडा सा दही चाहिए था.

 

पूरन: कल्याणी मेरे माता पिता भी दो दिन के लिए बहार गए हैं. मेरे पास दही हैं लेकिन वो ताजा नहीं हैं. लोगी क्या…!

 

पूरन ने लोगी क्या को थोडा खिंचा और उसे दबी आवाज में कहा.

 

कल्याणी: पूरन आप से मिलकर ख़ुशी हुई मुझे.

 

पूरन: मुझे उस से भी ज्यादा ख़ुशी हुई.

 

इतना कह के पूरन ने अपना हाथ कल्याणी की और बढ़ा दिया. दोनों ने हाथ मिलाये और पूरन के हाथ को मस्त स्पर्श हुआ मुलायम चमड़ी का.

 

कल्याणी: पूरन आप का हाथ तो बहुत हार्ड हैं यार.

 

पूरन: हां, वो तो हैं. अच्छा तुम किस कोलेज में पढ़ती हो.

 

कल्याणी: मैं सेंट्रल कोलेज में हूँ, लेकिन आजकल कम ही जाती हूँ. मेरे अब्बू कहते हैं की कोलेज रोज जाओंगी तो किसी लड़के को दोस्त बनाओगी, इसलिए मैं उनके डर से नहीं जाती हूँ.

 

पूरन: लेकिन मुझ से तो अब दोस्ती हो गई हैं ना? कहीं तुम्हारे अब्बू इस से तो नहीं डाटेंगे तुम्हे?

 

कल्याणी: नहीं मैं उन्हें हमारे बारे में पता ही नहीं चलने दूंगी.

 

कल्याणी के यह कहते ही पूरन समझ गया की वो एक लंड की प्यासी और रंडी किसम की लड़की हैं. और पूरन यह भी जान गया की इसे दही नहीं बल्कि लंड का मख्खन लेना था जिसके लिए वो यहाँ आई थी. पूरन ने अपने हाथ को उसके हाथ की और किया और कल्याणी को अपनी और खिंच लिया. कल्याणी के बूब्स पूरन की चेस्ट से टकरा गए.

 

कल्याणी: अरे इतनी जल्दी नहीं हम लोग दरवाजे पे खड़े हैं किसी ने देख लिया तो…!

 

पूरन ने कल्याणी को अंदर खिंचा और डोर को बंध कर दिया. डोर को बंध करते ही कल्याणी ने भी पूरन को बाहों में भर लिया और उसे लिप किस करने लगी. पूरन के हाथ कल्याणी के बूब्स पर चले गए और वो उन्हें दबाने लगा.

 

पूरन: बहुत बड़े हैं तेरे मम्मे तो कल्याणी…!

 

कल्याणी: पूरन जल्दी करो, अब्बू आ जायेंगे कुछ देर में.

 

पूरन: अरे हाँ मेरी रंडी मैं भी जल्दी ही चोदुंगा तुझे. मेरे को भी बहार जाना हैं और अगर 20 मिनिट में नहीं पहुंचा तो पुरे 22 लोग चोदने के लिए आ पहुंचेंगे.

 

कल्याणी: क्या?

 

पूरन: अरे मैं क्रिकेट के लिए जाऊँगा कुछ देर में, अगर मैं नहीं गया तो बाकी के लोग यहाँ आयेंगे मुझे बुलाने, और वो सभी चूत के प्यासे हैं. तेरी खुली चूत देख के वो थोड़ी अम्पायरिंग करेंगे, सब बेटिंग करेंगे सिर्फ बेटिंग.

कल्याणी हंस पड़ी. पूरन ने उसे उल्टा किया और निचे कुतिया बना दिया. कल्याणी ने अपने हाथ से अपना नाड़ा खोला और उसने सलवार को उतार दी. कल्याणी ने पेंटी को उतारने की जगह सिर्फ साइड पर कर दी. पूरन के लंड की जाने की जगह बन गई. पूरन ने अपना लंड कल्याणी की चूत पर रखा और एक ही झटके में उसे पेल दिया उसकी चूत के अंदर.

कल्याणी के मुहं से आह आह ओह ओह बहुत बबड़ाआआआआअ हैं, आह  आह आह…..निकलने लगा.

 

पूरन जोर जोर से अपने लंड को उसकी चूत में ठोकता रहा क्यूंकि दोनों को ही जल्दी चुदाई निपटानी थी. पूरन ने उसे पांच मिनिट चोदा और कल्याणी की चूत ने पानी निकाल दिया. पूरन की मुठ भी उसकी चूत में निकल पड़ी. कल्याणी कपडे पहन के खड़ी हुई और पूरन ने हाथ धोके उसे एक कटोरी दही दे दिया.

 

कल्याणी जाते हुए बोली, पूरन कल सुबह मिलते हैं मेरे अब्बू जब ऑफिस के लिए निकल जायेंगे तब. तुम कोलेज मत जाना.

 

पूरन ने कहा ठीक हैं कल चुदाई लम्बी करनी होंगी लेकिन. कल्याणी हंस के निकल पड़ी और पूरन ने आधी ठंडी मेगी खाना चालू किया.

 

पूरन साइकिल लेकर मेरे घर आया और कल्याणी की चुदाई वाली बात मुझे बताई. मैं बोला काश मैं भी तेरे घर होता यार. पूरन ने कहा चल मेरे घर चलते हैं. हम लोग खिड़की में खड़े हुए तो देखा की कल्याणी खिड़की में ही अपने बाल सुखा रही थी. पूरन से चुदाई के बाद शायद वो नहाने गई थी. पूरन ने यहाँ से उसे अपना लंड पकड़ के दिखाया. कल्याणी ने भी फ़्लाइंग किस भेजी.

 

मैं: पूरन तू कहे तो मैं अपना लंड भी दिखा दूँ इसे.

 

पूरन ने कहा, दिखा दे ना यार.

 

मैंने अपनी ज़िप खोल के अपना लंड निकाला और कल्याणी के सामने हिलाने लगा. उसने फिर से फ़्लाइंग किस भेजी और वो अपने बूब्स दबाने लगी. मैंने उसे आने के लिए इशारा किया तो उसने हाथ से कहा की कल आउंगी. पूरन बोला चल अब निचे चलते हैं किसी ने देख लिया तो पंगे होंगे. मैं और पूरन निचे आये और कुछ देर बाद मैं अपने घर चला गया.

 

दुसरे दिन मैं कोलेज के बजाय सीधे ही पूरन के घर आया. पूरन मेरी ही वेट कर रहा था. उसने मुझे बताया की कल्याणी ने इशारा किया हैं की उसके अब्बू के जाते ही वो यहाँ आएँगी. हम लोग पूरन के बरामदे में छिप के उसके बाप की गाडी के निकलने की राह देखने लगे. जैसे ही उसकी गाड़ी निकली कल्याणी इधर उधर देखती हुई सीधे पूरन के मकान की और आई. वो सीधे ही ऊपर आई और हम लोग भी घर में घुसे. अंदर घुसते ही पूरन ने कल्याणी को बाहों में भर लिया. कल्याणी मेरी और देख के बोली, ये कौन हैं, इनका लंड बहुत बड़ा हैं लेकिन नाम मुझे पता नहीं इनका पूरन?

 

पूरन, ये मेरा दोस्त कुलदीप हैं. उसे भी तेरी चूत लेनी हैं.

 

कल्याणी खुश हुई औरर बोली, मुझे थ्रीसम में बहुत मजा आता हैं…और आज तो लंड भी दोनों बड़े हैं.

 

कल्याणी के उतना कहते ही पूरन ने उसे नंगा कर दिया. वो भी पूरन के लंड को पकड के हिलाने लगी. मैंने भी अपनी ज़िप खोली और लंड बहार निकाला. कल्याणी अब दोनों हाथों से लंड हिला रही थी. हम दोनों ही अब उसकी चूत मारने के लिए बेताब थे. पूरन ने कल्याणी को उल्टा लेटने के लिए कहा. जैसे ही वो लेटी पूरन ने पीछे से उसकी चूत में लंड दे दिया. मैंने अपना लंड कल्याणी के मुहं में दे दिया. वो आह आह कर के अपनी गांड हिलाने लगी और पूरन उसे जोर जोर से चोदने लगा. उधर कल्याणी मेरे लंड को बड़े मजे से चूसने लगी. पूरन उसकी चूत में पूरा लंड डाल के उसे बड़ा सुख दे रहा था. कल्याणी ने भी जैसे घाट घाट का पानी पिया था क्यूंकि इतनी हार्ड चुदाई के बाद भी वो आराम से लंड को कुल्फी की तरह चूस रही थी. कल्याणी की चूत में पूरन के लंड अंदर बहार होने से फच फच की आवाज भी आ रही थी.

 

पूरन ने उसे 13 मिनिट चोदा और फिर अपना लंड चूत से निकाला. मैं अब उस चिकनी चूत के पास गया और उसमे अपने लंड को रख दिया. कल्याणी की चूत टाईट नहीं थी इतनी और मेरा लंड फट से अंदर घुस गया. कल्याणी अपनी गांड को हिलाने लगी और मेरा लंड उस प्रवाह में मस्ती करने लगा. उधर पूरन ने अपना लंड कल्याणी के मुहं में दे दिया और वो उसे चूसने लगी.

 

मैंने भी कल्याणी की चुदाई पुरे 15 मिनिट की. फिर मेरा लंड पानी निकाल बैठा. लेकिन पूरन अभी भी टाईट था.

 

पूरन: कल्याणी, अब मैं तुम्हे गांड में दूंगा.

 

कल्याणी: आ जाओ दे दो कहीं भी देना हो तुम्हे.

 

पूरन ने पीछे आके अपना लंड गांड में दे दिया. कल्याणी पहले मोअन कर रही थी लेकिन फिर वो मस्ती से गांड मरवाने लगी. पूरन ने उसकी गांड पुरे 7 मिनिट मारी और फिर अपना सारा पानी कूल्हों पर ही निकाल दिया. कल्याणी ने पानी को हाथ से लेके चाटा. फिर हम लोग बाथरूम गए और साथ में नहाये, नहाने के बाद पूरन पिज़्ज़ा लेने चला गया. जब वो पिज़्ज़ा ले के आया तब तो मैंने एक बार और कल्याणी को कुतिया बना के चोद लिया था. हम लोगों ने नंगे ही पिज्जा खाया. खाने के बाद फिर कल्याणी को हम दोनों ने मिल के चोदा और उसकी गांड भी मारी. घर जाने के समय कल्याणी बड़ी ही खुश थी.

 

कल्याणी अब हमसे रेग्युलर चुद्वाती हैं. और वो उसके आमिर बाप के पैसे भी हम पे लुटाती हैं.

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