मुख्य पृष्ठ » देसी सेक्स स्टोरीज » पांच लड़को के सामने मेरी चूत


पांच लड़को के सामने मेरी चूत

Posted on:- 2022-08-03


नमस्कार मेरे मित्रगणों  और सुनाइए कैसे आप सब मेरा नाम रितिका है और में हरियाणा  की रहने वाली हूँ, मेरी उम्र 26  साल है. दोस्तों में आज आप सभी चाहने वालों को अपनी एक सच्ची घटना और मेरा पहला एक्सीपिरिंस बताने जा रही हूँ. दोस्तों मेरी यह घटना तब की है जब में स्कूल में पढ़ती थी. में जब क्लास 12th में थी और तब मेरे साथ यह घटित हुई, लेकिन में आज तक भी अपनी उस घटना को भुला ना सकी. मुझे आज भी बहुत अच्छी तरह से वो सब कुछ याद है जो मेरे साथ घटित हुआ, क्योंकि वो सब कुछ मेरे साथ पहली बार हुआ था और वो मेरा पहला अनुभव बहुत अच्छा था और मैंने उसके पूरे पूरे मज़े लिए. मोटी गांड वाली लड़कियों की बात ही कुछ और है.


क्या गजब चुदकड़ अंदाज थी दोस्तों में उस समय इन सभी बातों के बारे में इतना सब कुछ नहीं समझती थी और ना ज्यादा जानती थी, क्योंकि में अभी अभी जवान हुई थी और मेरे शरीर ने धीरे धीरे अपना आकार बदलना शुरू किया था. मुझे उन सब का बहुत मज़ा आया. दोस्तों में दिखने में एकदम ठीक ठाक, मेरा गोरा रंग, छोटे आकार के बूब्स, थोड़ी बाहर निकली हुई गांड और में उस समय अपनी साईकिल से स्कूल जाती थी. हमारी कॉलोनी के कुछ लड़के भी उसी स्कूल में पढ़ते थे और में उन्हें भैया कहती थी. लड़किया क्युआ गजब चुदकड़ होती है दोस्तों.


 मेरे मित्रगणों  क्या मॉल थी उसकी चुची पीकर मजा आ गया वो बारिश का समय था और एक दिन सुबह स्कूल जाते समय हम सभी भीग गये, तो रास्ते में हम लोग एक आधे बने हुए घर में जाकर बारिश से बचने के लिए खड़े हो गये और बारिश के रुकने का इंतजार करने लगे. जो लड़के मेरे साथ रुके हुए थे, उन लड़को के नाम थे कुणाल चूतड़ , मनीष, पुलकित आवारा , सुरेंद्र छुटमारे और कुलविंदर दस . मै एक नंबर का आवारा चोदा पेली करने वाला  लड़का हु मुझे लड़किया चोदना अच्छा लगता है.


 मेरे प्यारे दोस्तो चुची पिने का मजा ही कुछ और है दोस्तों सुरेंद्र छुटमारे थोड़ा पतला दुबला सा था और उसे पानी में ज्यादा भीगने की वजह से अब ज्यादा ठंड लगने लगी थी, तो उन सभी ने उससे कहा कि तू अपने कपड़े उतारकर  ये कहानी पढ़ कर आपका लंड खड़ा नहीं हुआ तो बताना  लड खड़ा ही हो जायेगा  निचोड़कर थोड़ी देर फैला ले और सूखने पर पहन लेना. फिर सुरेंद्र छुटमारे ने अपनी शर्ट को उतार दिया और फिर उसने अपनी पेंट को भी उतार दिया और उसको देखकर बाकी सभी ने अपनी शर्ट को एक एक करके उतार दिया. उन्हें इस तरह देखकर मुझे थोड़ा अजीब सा लग रहा था, लेकिन वो सब बिल्कुल फ्री होकर घूम रहे थे और उन्हें मेरे वहां पर होने से कोई दिक्कत नहीं थी. फिर थोड़ी देर बाद में भी उनके जैसी हो गई और उन्हें देखने लगी, लेकिन तभी अचानक से कुणाल चूतड़  ने सुरेंद्र छुटमारे की अंडकुणाल चूतड़ यर को पकड़कर एक झटका देकर तुरंत नीचे सरका दिया और बस फिर तो वो सब उस पर टूट पड़े और उन्होंने उसे पूरा नंगा कर दिया. मेरे मित्रगणों  चुत छोड़ने के बाद सुस्ती सी आ जाती है.    


 क्या बताऊ मेरे मित्रगणों   उसको देखकर किसी लैंड टाइट हो जाये अब वो बहुत शरमाने लगा और अपना लंड छुपाने लगा और बहुत गुस्सा भी करने लगा. मुझे भी वो सब देखकर हँसी आ गयी तो वो और गुस्सा हो गया और उन लोगों का तो कुछ कर नहीं पाया तो वो मेरे ऊपर कूद पड़ा और मुझे गिराकर मेरी स्कर्ट को ऊपर करके मेरी पेंटी को खींच दिया. तभी पेंटी मेरे पैरो में फँस गयी इसलिए पूरी नहीं उतरी सकी, लेकिन उसने मुझे पकड़कर मेरे पैरों को पूरा खोल दिया जिसकी वजह से उन सभी ने मेरी चूत को देख लिया और मेरी चूत को देखकर वो सभी बहुत खुश हो गये थे. मुझे भी पता नहीं उस समय क्या हुआ मुझे उस बात का बिल्कुल भी बुरा नहीं लगा, बल्कि मैंने खुद ने ही अपने पैर खोलकर रखे, जबकि सुरेंद्र छुटमारे ने तो मेरे पैर अब छोड़ दिए थे. अब वो सभी मेरे पास आकर खड़े हो गये और में वैसे ही अपने पैर मोड़कर खोलकर लेटी रही. मेरे मित्रगणों  मने बहुत सी भाभियाँ चोद राखी है.


 मेरे मित्रगणों  क्या मलाई वाला माल लग रहा था     फिर कुणाल चूतड़  बोला अरे देख तेरे तो अभी से बाल आ गये वो भी इतने सारे और तब मुझे कुछ लगा और मैंने तुरंत अपने दोनों पैरों को बंद कर लिया तो वो लोग मुझसे बोले कि प्लीज थोड़ी सी देर तो देखने दे ना? अब मैंने उनसे कहा कि इतनी देर देख तो ली. तभी मनीष बोला कि जब हमने तेरी देख ली है, तो तू अब हमसे क्यों छुपा रही है, अभी कुछ देर देखने ही दे और यह बात कहकर उसने मेरे घुटने पकड़कर दोबारा खोल दिए और मैंने भी खुद ही खोल दिए और बैठकर अपनी पेंटी को पूरी उतार दिया. फिर में जब खड़ी हुई तो मेरी स्कर्ट के नीचे होने की वजह से वो सब कुछ ढक गया. फिर मनीष बोला कि अरे देख तेरे सब कपड़े गंदे हो गये है, दोस्तों मेरे नीचे गिरने से गीले कपड़ो पर रेत और धूल चिपक गयी थी, अब वो लोग मुझसे बोले कि तू इन्हें उतारकर पानी से धो ले और उसके मुहं से यह बात सुनकर मैंने उनकी तरफ गुस्से से घूरकर देखा. चुदाई की कहानी जरूर सुनना चाहिए मजे के लिए.


 साथियो की पुराणी मॉल छोड़ने का मजा ही कुछ और है मनीष बोला कि हम सभी ने तेरी चूत देख तो ली ना, मैंने तुझे अभी समझाया ना, फिर क्या समस्या है और वो अब खुद आगे बढ़कर मेरी स्कर्ट को उतारने में मेरी मदद करने लगा था. मैंने एक बार फिर से उसे रोका और में उससे बोली कि भैया में इस टाइप की लड़की नहीं हूँ जैसा आप सभी मुझे समझ रहे हो, में अपने सारे कपड़े आप सभी के सामने नहीं उतार सकती, मुझे बहुत शर्म आती है, प्लीज आप लोग मेरी बात का मतलब समझो, आप सभी ने तो अभी मेरी बस वो देखी है, लेकिन मैंने आपसे कुछ भी नहीं कहा और इसका मतलब यह नहीं है कि अब में आपके सामने पूरी नंगी हो जाऊँगी. तभी कुणाल चूतड़  तुरंत बीच में बोला वो क्या? बस तू एक बार हमे इस चीज़ का नाम बता दे तो में तुझे एक रास्ता बताऊंगा जिससे तेरे कपड़े भी साफ हो जाएँगे और तुझे हम सबके सामने पूरी नंगी भी नहीं होना पड़ेगा. अब सुनिए चुदाई की असली कहानी.

 मेरे मित्रगणों  एक बार चोदते  चोदते  मेरा लंड घिस गया फिर मैंने कहा कि ऐसे कैसे होगा? वो बोला कि पहले तू ‘वो’ का मतलब बता फिर में तुझे वो रास्ता बताऊंगा, तो मैंने उससे कहा कि हाँ में बोल दूँगी में पक्का वादा करती हूँ, लेकिन पहले आप मुझे प्लीज वो तरीका बता दो, तभी वो बोला कि नहीं तू बाद में नहीं बोलेगी, तुझे पहले बताना होगा. वहा का माहौल बहुत अच्छा था  मेरे मित्रगणों. 


 मेरे मित्रगणों  उस लड़की मैंने चुत का खून निकल दिया मैंने कहा कि भैया मैंने आपसे पक्का वादा किया है कि में वो बोल दूँगी, फिर भी आप मेरे ऊपर विश्वास नहीं कर रहे हो और वैसे भी मुझे तो हर रोज़ आप लोगों के साथ ही आना जाना है, आपसे मुझे इतनी सी बात के लिए अपनी दोस्ती खत्म थोड़ी ना करनी है. अब वो मुझसे बोला कि चल अब थोड़ा ध्यान से सुन तू ऊपर जाकर देख ले, छत तो खुली है और तू वहाँ पर जाकर अपने कपड़े उतारकर बारिश के पानी में सबको धो ले फिर वापस तू उन्हें पहनकर नीचे आ जाना. यहाँ आस पास वैसे कोई इतना उँचा मकान भी नहीं है और फिर इतनी बारिश में दूर से कौन सा कुछ दिखेगा. वहा जबरजस्त माल भी थी मेरे मित्रगणों.  


 मेरे मित्रगणों  चोदते चोदते चुत का भोसड़ा बन गया दोस्तों अब में उनकी यह बात सुनकर मन ही मन सोचने लगी कि उनकी यह बात तो बिल्कुल ठीक है और अब यह सभी बातें जब में सुन रही थी तो मेरी नज़र अचानक से सुरेंद्र छुटमारे के लंड पर चली गई और में उसको लगातार बिना पलके झपकाए घूर घूरकर देखने लगी. तभी कुलविंदर दस  मुझसे बोला कि तुझे शायद आज सुरेंद्र छुटमारे का लंड बहुत पसंद आ रहा है और अगर ऐसा है तो तुम बिना देर किए उसके लंड को पकड़कर देख ले. ऐसे माहौल कौन नहीं रहना चाहेगा मेरे मित्रगणों.  


 मेरे मित्रगणों  एक बार मैंने अपने गांव के लड़की जबरजस्ती चोद दिया दोस्तों मुझे उसके मुहं से यह बात सुनकर बहुत शरम आ गयी और मैंने तुरंत अपनी नजर को उधर से हटा लिया तो वो सभी हँसने लगे और मुझे भी हँसी आ गई, तभी में ऊपर जाने लगी तो वो मुझसे बोले कि ओये झूठी तू अपना वो वादा तो पूरा कर जो तूने अभी किया था, चल अब जल्दी से बता दे. उह क्या मॉल था मेरे मित्रगणों  गजब.


 मेरा तो मन ही ख़राब हो जाता था मेरे मित्रगणों   फिर में तुरंत वहीं पर रुक गई और अब में ऐसी बात अपने मुहं से बोलने की हिम्मत जुटाने लगी थी और फिर ऐसा भी नहीं था कि मैंने यह सब पहले कभी नहीं सुना था और हम लड़कियां भी आपस में यह सब शब्द कभी कभी बोल लेते थे, लेकिन इस तरह लड़को के सामने बोलना अलग बात थी. मुझे भी वैसे अब बहुत मज़ा आ रहा था और मुझे अब हल्की हल्की ठंड भी नहीं लग रही थी और इस सबसे मेरे शरीर में गरमी आ गयी थी. क्या बताऊ मेरे मित्रगणों  मैंने चुदाई हर लिमिट पार कर दिया.


 कुछ भी  हो माल एक जबरजस्त था  फिर में एक मिनट रुकी और फिर बोली कि आप सभी ने मेरी चूत को देख ही लिया है और में हंसकर ऊपर भाग गयी तो वो सभी मेरे मुहं से यह शब्द सुनकर एकदम खुश हो गये और फिर मैंने तुरंत छत पर जाकर देखा कि उनका कहना बिल्कुल सही था. छत पर उस समय बहुत तेज़ बारिश हो रही थी मैंने जाकर जल्दी से अपनी स्कर्ट को उतार दिया और फिर मैंने इधर उधर देखकर उसको साफ किया और फिर अपनी शर्ट को भी उतारकर साफ की, लेकिन दोस्तों इस काम को करते हुए में बहुत ही ज़्यादा भीग गयी थी और साथ में मेरी ब्रा भी. अब इतनी गीली ब्रा पहनना तो बिल्कुल मुश्किल था इसलिए मैंने उसको भी उतार दिया. उसको देखकर  किसी का मन बिगड़ जाये.


 मेरे मित्रगणों  मैंने किसी भाभी को छोड़ा नहीं है दोस्तों मेरे मन की सच्ची बात पूछो तो यह मेरा वो पल था जिसने आज मेरी सोच को बिल्कुल ही बदलकर रख दी थी और में उस वक़्त पूरी नंगी एक खुली छत पर खड़ी थी. मेरे नंगे बदन पर गिरता हुआ वो ठंडा पानी मेरे जिस्म को और भी गरम कर रहा था और नीचे पांच लड़के थे जिन्हें बहुत अच्छी तरह से पता है कि में उस समय छत पर एकदम नंगी हूँ और उन सीडियों पर कोई दरवाज़ा भी नहीं था. उह भाई साहब की माल है उसकी चुत की बात ही कुछ और है.


 मेरे मित्रगणों  एक बार स्कूल में चुदाई कर दिया बड़ा मजा आया मुझे अब मन ही मन एक अजीब सी खुशी सी होने लगी थी और मेरा मन हो रहा था कि में पूरी नंगी ही इस पूरी छत पर घूमूं और ऐसे ही पूरी नंगी रहूं और फिर मैंने यही सब किया. में ऐसे ही छत पर थोड़ा सा इधर उधर चली फिर बाहर की साइड से मैंने नीचे की तरफ झाँककर देखा जहाँ पर हमारी सभी की साईकिल खड़ी हुई थी. दोस्तों उस छत पर दीवार तक भी नहीं थी. अगर इतनी तेज़ बारिश ना होती तो कोई भी बाहर सड़क से मुझे पूरी नंगी देख लेता. मेरे मित्रगणों  चोदते  चोदते  कंडोम के चीथड़े मच गए.


 ओह्ह उसके यह का चुम्बन की तो बात अलग है तभी अचानक से पता नहीं मुझे क्या सूझा और मैंने अपनी गांड को उस तरफ करके बाहर की तरफ निकालकर मैंने अपना हाथ हिलाया और ऊपर की तरफ देखने लगी. फिर कुछ देर बाद में हँसती हुई भागकर सीडियों तक आ गयी. सच पूछो तो दोस्तों में उस समय बिल्कुल पागल हो चुकी थी. फिर मैंने अपनी शर्ट और स्कर्ट को पहन तो लिया, लेकिन इतने ज़्यादा भीगे हुए कपड़े, एक तो इतने भारी हो गये थे और उन्हें पहनकर मुझे अब बहुत अजीबोगरीब भी लगा, लेकिन मैंने मजबूरी में उन्हें पहन लिए और फिर में नीचे आ गई. एक बार मैंने अपने मौसी की लड़की को जबरजस्ती चोद दिया.


 है उसके गांड मेरा मतलब तरबूज क्या गजब भाई तब मैंने देखा कि वो सब सिगरेट पी रहे थे और मेरी गीली शर्ट मेरे गरम भीगे हुए बदन से एकदम चिपक गयी थी, जिसकी वजह से उन्हें मेरे बूब्स का आकार और मेरे बूब्स की निप्पल का उन्हें साफ साफ पता चल रहा था और वो सभी मेरे बूब्स को घूर घूरकर देख रहे थे. मेरे मित्रो मामा की लड़की की चुदाई में बड़ा मजा आया.


 मेरे मित्रगणों  कई बार जबरजस्ती शॉट मरने में चुत से खून निकल गया दोस्तों मुझे अब बहुत ठंड लग रही थी, क्योंकि में अपने कपड़ो के साथ साथ पूरी भीगी हुई थी और में उसकी वजह से हल्की हल्की काँप भी रही थी और जब मैंने अपनी ब्रा और पेंटी को अपने बेग में रखी तो वो सब मेरी तरफ देखकर हंस रहे थे और सुरेंद्र छुटमारे ने भी अब तक अपनी अंडकुणाल चूतड़ यर को पहन लिया था. दोस्तों उसके कुछ देर बाद बारिश रुकने लगी और हम लोग अपने घर पर वापस आ गए, लेकिन उसके बाद मेरे मन में वो सारी घटना घूमने लगी में बार बार ना चाहते हुए भी उसी के बारे में सोचने लगी मुझे अब कुछ कुछ होने लगा था, वो सब कुछ में आप लोगो को किसी भी शब्द में नहीं बता सकती, लेकिन सच पूछो तो में बहुत खुश थी. उसका भोसड़ा का छेड़ गजब का था मेरे मित्रगणों  मुझे तो कभी कभी चुदाई का टाइफिड बुखार हो जाता है और जब तक चुदाई न करू  तब तक ठीक नहीं होता.

What did you think of this story??






अन्तर्वासना इमेल क्लब के सदस्य बनें


हर सप्ताह अपने मेल बॉक्स में मुफ्त में कहानी प्राप्त करें! निम्न बॉक्स में अपना इमेल आईडी लिखें, फिर ‘सदस्य बनें’ बटन पर क्लिक करें !


* आपके द्वारा दी गयी जानकारी गोपनीय रहेगी, किसी से कभी साझा नहीं की जायेगी।