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बीवी को बदलकर लिया चुदाई का मजा

Posted on:- 2022-07-26


मेरे मित्रो आप सब कैसे है,  मैंने अब तक बहुत सारी सत्य घटनाओं पर आधारित चोदा पेली की कहानी को पढ़कर उनके मज़े लिए और इसलिए आज में भी अपनी एक सच्ची कहानी आप लोगों को सुना रहा हूँ, जो सबसे अलग हटकर है और जिसमें मैंने अपनी पत्नी की जगह दूसरे की पत्नी की अदला-बदली करके उसकी चुदाई के मज़े लिए, लेकिन वो सब कुछ मैंने कैसे किया? अब आप उसको पूरे विस्तार से सुने और आगे पढ़े. में उम्मीद करता हूँ कि यह आपको सभी को जरुर पसंद आएगी और आप इसका पूरा मज़ा ले सकते है. उह यह उसकी नशीली आँखे में एक दम  चुदकड़ अंदाज है.

 मित्रों मुझे तो कभी कभी चुत के दर्शन मात्र से खूब मजा आता क्योकि मई पहले बहुत बार अपने मौसी के लड़की  को बिना पैंटी के देखा था  वाह क्या मजा आया था दोस्तों में 55 साल का और मेरी पत्नी 54 साल की है, मेरा नाम सुमित और मेरी पत्नी का नाम   है, मेरी लम्बाई 5.6 वजन 72 किलो और मेरी पत्नी की लम्बाई 4.9 और उसका वजन 60 किलो है. हमारी शादी हुए 32 साल हो गये है, हमारे दो बेटे है जो बाहर रहते है और उनकी भी शादी हो गई है. मेरी पत्नी चेहरे से गोरी और थोड़ी सी मोटी है, उसके फिगर का आकार 38-40-42 है. वैसे में भी मोटा हूँ और मेरी छाती 42 कमर 40 है, लंड छोटा करीब 4.4 लम्बाई और मोटाई 1.5 है. मित्रों देखने से लगता है की वो पका चोदा पेली का काम करती होगी.


  अब चुदाई करने को  १००% तैयार थी मित्रों चुत को चाटेने के  समय उसके बूर के बाल मुँह में आ रहे थे दोस्तों हमारे बेटों के बाहर चले जाने के बाद हम दोनों पति, पत्नी अकेले हो गये थे, जिसकी वजह से हम दोनों को हमारी सेक्स लाईफ अब बहुत ज्यादा बोर लगने लगी थी, में कभी कभी मजाक में परमिला को बोलता था कि तुम्हारी लम्बाई बहुत छोटी है, इसलिए मुझे वैसा मज़ा नहीं आता जैसा आना चाहिए, तुम्हारी लम्बाई कम से कम 5 फीट तो होनी चाहिए और फिर में उसको ताना मारता कि तुम्हारी जोड़ी तो मेरे दोस्त सुरेंद्र  से मिलती है, जिसकी लम्बाई मुश्किल से 5 फीट से ज़्यादा थी. मन कर रहा था कब इसे चोद लू मेरा लंड समझने  को तैयार नहीं था.

 अब बिना चुदाई के रह नहीं सकता था मित्रों मै पागल सा हो गया कुछ दिन तो वो मेरी सभी बातें चुपचाप सुनती रही, लेकिन एक रोज वो भी मुझे ताना मारते हुए मुझसे बोली कि आपकी जोड़ी भी रेखा से मिलती है, यानी सुरेंद्र  कि पत्नी जो 5 फिट से ज़्यादा लंबी थी, यह बात उसने तब कही जब में एक रात को अपना लंड उसकी चूत में डालकर लगातार धक्के देकर उसकी चुदाई कर रहा था और उसके मुहं से यह बात सुनते ही मुझे सबसे पहले एक अजीब सा झटका लगा कि आज मेरी पत्नी मुझसे यह कैसी बातें कर रही है, क्या यह पागल हो चुकी है. ओह ओह ओह है कब लंड को घुसा दू ऐसा लग रहा था मित्रों.

 मॉल था चुदाई के लायक लेकिन फिर में मन ही मन सोचने लगा कि आज मेरे नीचे लेटी मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर मुझसे जो अपनी चुदाई करवा रही है, वो मेरी पत्नी परमिला नहीं सुरेंद्र  की पत्नी रेखा है और उसको सोचकर मुझे चुदाई करने में ज्यादा मज़ा आने लगा और उस समय परमिला मुझे बहुत अच्छी लगने लगी थी, में बहुत कस कसकर धक्के देकर चुदाई करने लगा और अब वो मुझसे कहने लगी वाह आज तो मुझे चुदाई करवाने में बहुत मज़ा आ रहा है और जब हम दोनों झड़कर चुदाई से फ्री हो गये तो हमे लगने लगा कि दूसरे को मन ही मन सोचकर चुदाई करने में बहुत मज़ा आता है. उसके बाद से जब भी में अपनी पत्नी को चोदता तो उस समय मेरा शरीर मेरी पत्नी के साथ होता, लेकिन मेरी सोच में बस रेखा होती और उसको समझकर में अपनी पत्नी को बहुत जमकर चोदता और वो भी मेरी चुदाई से बहुत ज्यादा चकित हुआ करती, चुदाई के बाद वो मुझसे मेरे उस जोश के राज बहुत बार जानने की कोशिश करती थी, लेकिन में उसकी बात को टाल दिया करता था.

फिर एक दिन किस्मत से मेरा दोस्त सुरेंद्र  और उसकी पत्नी रेखा एक दिन हमसे मिलने हमारे घर पर आ गए तो उनको देखकर हम दोनों को मन ही मन लगा कि हम जिस घड़ी का इतने समय से इंतज़ार कर रहे थे और वो घड़ी आज आ गई है, इस बात को मन में सोचकर हम दोनों बहुत खुश थे, हम सभी लोगों ने साथ में बैठकर खाना खाया और उसके बाद हम सभी हॉल में एक साथ बैठकर बातें हंसी मजाक करने लगे. दोस्तों बातें करते करते मेरी नज़र रेखा पर जमने लगी और में उसके गोरे चुदकड़  बदन को घूर घूरकर देखने लगा, वो दिखने में बहुत ही सुंदर उसका वो आकर्षक बदन मुझे अपनी तरफ खीँच रहा था. मैंने सोचा पेलुँगा जरूर  कभी न कभी.

उसके बड़े आकार के चूचिया गोल मटोल गांड को देखकर में पागल हो चुका था और अब मेरी पत्नी परमिला की नज़रे भी सुरेंद्र  के गठीले शरीर पर ठहर गई, वो भी उसके अंदर अपने लायक वो सब देखने लगी जो उसके काम का था. तभी मैंने मौका देखकर सुरेंद्र  से कहा कि यार मेरी पत्नी परमिला कद में बहुत छोटी है, इसलिए मेरी इससे इतनी जोड़ी नहीं मिलती और फिर मेरी बात को वहीं पर काटते हुए रेखा तुरंत कहने लगी कि यह सब तो चलता ही है, आप  माल चुदाई के लिए तड़प रही थी मित्रों  भी देखो में भी कितनी लंबी पूरी हूँ और मेरे पति कितने छोटे है, लेकिन अब हम लोग इस समस्या का क्या करें? आप भी देखिए ना मेरी जोड़ी तुमसे मिलती है और इनकी जोड़ी परमिला से. अब सुरेंद्र  बोला कि छोटा बड़ा होने से क्या होता है? यह सब बेकार की बातें है, में इन बातों को नहीं मानता और मेरा मानना तो यह है कि बस चुदाई करने के लिए लंड बड़े आकार का होना चाहिए, मेरा लंड तो पूरा 6 इंच का है, क्यों तुम्हारा लंड है क्या इतना बड़ा? तो परमिला बोली कि नहीं इनका इतना बड़ा नहीं, थोड़ा छोटा है. दोस्तों इस तरह एक दूसरे से खुलकर बहस बाज़ी करने से हम सभी धीरे धीरे हॉट होने लगे थे. तभी मैंने मौके का फायदा उठाकर कहा कि आज तो हमारी अदला बदली हो जाए और देखते है कि किसको किसके साथ कितना मज़ा आता है और मुझे लगा कि सुरेंद्र  को मेरी यह बात जम गई, वो भी मेरी बात से सहमत होने वाला था, लेकिन अभी तक मुझे उसकी तरफ से कोई भी जवाब नहीं मिला था और अब हम दोनों खड़े हो गये, में अपनी जगह से उठकर रेखा के पास जाकर उससे एकदम चिपककर बैठ गया और मुझे यह सब करते देखकर सुरेंद्र  भी उठकर मेरी पत्नी परमिला के पास चला गया और वो भी उसके पास बैठ गया. जब माल अच्छा हो तो कौन नहीं  चोदना चाहेगा  है न मित्रों.
 चोदने के बाद थोड़ा रिलेक्स हुआ भाइयो क्या गजब मजा आया दोस्तों रेखा आकार में लंबी, गोरी भूरी, सुंदर गोल चेहरा, बड़ी बड़ी काली आखें, लंबे काले बाल और भरे हुए शरीर की मालकिन थी, उसका वजन करीब 66 किलो और उसके चूचिया का आकार 38-36-42 था. उसको देखकर किसी का भी  लंड पानी छोड़ दे और उसकी चुदाई करने के लिए हर कोई तैयार हो जाए. उसको कई बार चोदकर भी उसका मन ना भरे वो उसको चोदता ही रहे. सेक्स करते समय बहुत मजा आया था मित्रों.

 उसके ओठ रसीले थे मित्रों मॉल गजब था मित्रों अब मैंने उसकी पीठ पर अपना एक हाथ रख दिया और फिर अपने हाथ को नीचे सरकाकर कमर तक पहुंचा दिया और समय खराब ना करते हुए तुरंत उसकी गोरी कमर को पकड़कर उसको अपनी तरफ खींच लिया, उस अचानक दिए झटके की वजह से उसके गोल मुलायम चूचिया मेरी छाती से लग गए और मैंने उसे किस किया, सबसे पहले हाथों पर, फिर गाल होंठो पर. उसके लिप्स की चूसै यू ही चलती रही  मित्रों.

 मित्रों वो मदहोस थी चुदाई के लिए उसके बाद मैंने उसके होंठो को चूसना शुरू किया और फिर कपड़ो के ऊपर से ही उसके चूचिया को मसलना, सहलाना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से वो बहुत ही जल्दी से गरम हो गई और अब वो मेरे गले में अपनी बाहें डालकर मुझसे ज़ोर से चिपकने लगी. मैंने एक झटका देकर उसकी साड़ी को पकड़कर खींच उसके बूब्स क्या मस्त थे मित्रों अब मै क्या कहु मित्रों दिया, जिसकी वजह से अब उसका ब्लाउज मेरे सामने आ गया और मैंने जल्दी से ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए, जिसकी वजह से अब उसकी ब्रा में उसके चूचिया नज़र आने लगे थे.

 मेरा मन चुदाई का था मित्रों मैंने ब्लाउज को पीछे की तरफ उतारकर खोल दिया और ब्रा के ऊपर से ही उसके चूचिया को मसलने और उनका रस निचोड़ने लगा, उसकी दोनों आँखे बंद थी और वो आह्ह्ह वाह मुझे बहुत मज़ा आ रहा है हाँ और ज़ोर से दबाव ऊईईईइ हाँ आज तुम इनका पूरा रस निचोड़ दो उफफ्फ्फ्फ़ कर रही थी. अब मैंने उसे खड़ा करके उसकी साड़ी को पूरा खोल दिया और ब्रा का हुक खोलकर ब्रा को नीचे फेंक दिया, जिसकी वजह से वो अब मेरे सामने सिर्फ़ पेटिकोट में खड़ी हुई थी, मेरी नजर उसके कपड़ो के अंदर छुपी सुन्दरता को देखकर बहुत चकित थी, क्योंकि वो अंदर से ऐसी होगी मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था.

फिर मैंने अपने दूसरी तरफ देखा कि सुरेंद्र  भी अब एकदम पूरा नंगा होकर खड़ा हुआ था, शायद उसको भी हम दोनों को देखकर जोश आने लगा था और परमिला जो उसके सामने पेटिकोट में थी, वो उसके बड़े बड़े चूचिया को अपने मुहं में लेकर चूस रहा था, उसका लंड एकदम तना हुआ था और परमिला उसके लंड को अपने एक हाथ में लेकर धीरे धीरे हिलाते हुए मस्त हुई जा रही थी. उस समय वो दोनों भी पूरे गरम हो चुके थे और उनको भी किसी से कोई मतलब नहीं था, बस चुदाई करने के लिए व्याकुल थे. मैंने तय किया की चोद कर ही दम लूंगा.

 लेकिन पेलुँगा जरूर फिर जब मैंने यह नज़ारा देखा तो में भी एकदम से पहले से ज्यादा गरम हो गया और मेरा लंड भी अब मेरी पेंट में तनकर खड़ा हो चुका था और अब वो हिलोरे लेने लगा था, इसलिए मैंने जल्दी से अपने सभी कपड़े उतारकर में पूरा नंगा हो गया और रेखा के चूचिया को पूरे जोश में आकर बहुत ज़ोर से दबाते हुए मुहं में भरकर चूसने लगा, जिसकी वजह से रेखा भी जोश में आकर बहुत मस्त हो रही थी और वो अपने एक हाथ में मेरा लंड पकड़कर ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी थी. मै चुदाई के लिए बिल्कुल बेताब  था  मित्रों.

 मुझे तो बस चुदाई की धुन सवार थी मित्रों  अब में रेखा को अपनी बाहों में भरकर बेडरूम में लेकर चला गया और मैंने उसको तुरंत डबल बेड पर लेटा दिया और एक बेड को खीँचकर अलग कर लिया और अब मैंने उसके पास में बैठकर उसके चूचिया को अपने मुहं में भर लिया और उसने जोश में आकर बहुत मस्त होकर अपनी दोनों आँखे बंद कर ली और मज़े लेने लगी थी और मैंने देखा कि कुछ देर बाद सुरेंद्र  भी परमिला को बेडरूम में लेकर आ गया और वो दोनों मुझे बूर की मादक खुसबू आ रही थी जो मुझे पागल कर रहे थे दूसरे बेड पर चले गये, परमिला ने इतना मस्त लंड देखा तो वो मस्त होकर बेड के नीचे आकर अपने दोनों घुटनों पर बैठकर वो सुरेंद्र  के लंड की चमड़ी को हटाकर सुपाड़े को अपने मुहं में लेकर चाटने चूसने लगी.

 दिन रात बस चुदाई ही चुदाई ख्याल मित्रों और कुछ नहीं फिर में भी यह सब देखकर बहुत मस्त हो गया और में धीरे धीरे अपने मुहं को नीचे ले आया, सबसे पहले में उसकी नाभि में अपनी जीभ को डालकर घुमाने लगा और फिर कुछ देर बाद में उसकी गीली जोश से भरी चूत के दाने को अपनी जीभ से चाटने लगा और दाने पर अपनी जीभ को छूते ही रेखा के बदन ने जैसे बिजली का झटका खाया और वो ज़ोर से मेरा सर पकड़कर मेरा मुहं अपनी चूत पर दबाने लगी, वो जोश में आकर ज़ोर से आगे पीछे होने लगी थी और मुहं से आवाज़ निकाल रही थी आह्ह्हह्ह्ह्हहह हाँ और उउर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्ररर प्यार से चाटो वाह आज तो मज़ा आ गया, मुझे ऐसा मज़ा कभी नहीं आया था. सच कहु तो वो चुदाई तो तरस रही थी दो

 उसकी आखो में चुदाई का नशा था अब मैंने उसकी चूत की पंखुड़ियों को अपने एक हाथ की उँगलियों से खोलते हुए अपनी जीभ को उसकी खुली हुई चूत की दीवारों में डाल दिया और अब में उसकी चूत को अपनी जीभ से ही चोदने लगा था और उधर सुरेंद्र  की आवाज़ आ रही थी, उफ्फ्फ्फ़ हाँ परमिला रानी हाँ थोड़ा और ज़ोर से चूसो, हाँ इसको पूरा अपने मुहं में ले लो आह्ह्ह्ह मुझे बहुत मज़ा आ रहा है, ऐसा मज़ा मुझे कभी नहीं आया और उसकी यह बातें सुनकर मेरा लंड अब आपे से बाहर हो रहा था. मेरा लंड उसकी बूर को चिर कर आगे निकाल रहा था

 मैंने उसकी बूर का सील तोड़ दिया मित्रों तभी रेखा बोली ओहह्ह्हह आईईईइ अब में गई काम से, में अब झड़ने वाली हूँ और इतना कहते हुए ही उसकी चूत ने अपना पानी छोड़ दिया, मुझे ऐसा लगा जैसे कि मेरे मुहं में रस भर गया हो और में उसकी चूत को आखरी बूँद तक चाटता रहा. फर्स्ट टाइम चुदाई में सील टूटती है तो थोड़ा तो दर्द होगा ही.

 लंड घुसाने में लग रहा था बस चुत फैट ही जाएगी मित्रों  दोस्तों अब मेरी बारी थी. मैंने सुमन के दोनों पैरों को फैला दिया और में उसके पैरों के बीच में आ गया और अब उसके दोनों पैरों को अपने कंधे पर रखकर मैंने अपने लंड का सुपाड़ा उसकी चूत के मुहं पर रखकर एक ज़ोर से धक्का मार दिया, जिसकी वजह से उसकी चूत तो पहले ही पानी से चिकनी थी तो लंड को अंदर डालते ही चूत में पूरा चला गया और और उसकी चूत के तले से जाकर टकरा गया, जिसकी वजह से सुमन के मुहं से एक आह्ह्हह्ह्ह्ह निकली तो मैंने लंड को पूरा बाहर खींचा और एक बार फिर ज़ोर से धक्का मार दिया, वो मस्ती से सिसकी भरती हुई आवाज़े निकालने लगी, आहहह्ह्ह्ह वाह क्या बताऊँ बहुत मज़ा आ रहा है. क्या गजब लग रही थी मित्रों.

 मित्रों मॉल हो तो ऐसा फिर में ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा और रेखा मुझसे बोलने लगी हाँ और ज़ोर से चोदो मुझे मेरे राजा, फाड़ दो मेरी चूत को आज आईईईईई ओहहहह में गई में गई और इस तरह से आनंद लेते हुए उसकी चूत ने एक बार फिर से उसकी चूत से पानी छोड़ते हुए मेरे लंड का अभिषेक कर दिया. में और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा, मुझे तब ऐसा लगा कि दुनिया की सारी मस्ती सारा जोश मेरे लंड में आ गया है और में उुउउर आह्ह्ह्ह करते हुए मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी और उसकी सारी चूत मेरे वीर्य से भर गई और उसने मस्त होकर अपनी आखें मूंद ली. कुछ देर में उसके ऊपर ऐसे ही लेटा रहा और फिर कुछ देर बाद हम दोनों एक दूसरे से अलग हो गये. क्या रस भरी चुत थी मित्रों मजा आ गया.

 लड़कियों की चुत मरने का मजा ही कुछ और है  मित्रों अब उधर सुरेंद्र  भी परमिला की मस्ती से चुदाई किए जा रहा था, वो दोनों बहुत जोश में थे और मुझे परमिला का चेहरा देखकर अंदाजा लग रहा था कि उसको सुरेंद्र  के लंबे मोटे लंड से अपनी चूत की चुदाई करवाने में बहुत मज़ा आ रहा था, वो अहह्ह्ह ऊहहहह हाँ जाने दो पूरा अंदर हाँ ज़ोर से धक्के दो वाह मज़ा आ गया कि आवाज़ निकाल रही थी और वो कह रही थी कि उसको अपनी चुदाई करवाने में आज जैसा मज़ा कभी नहीं आया हाँ किए जाओ और भी दम लगाकर तुम अपना काम किए जाओ और आज तुम मेरी चूत को भी फाड़ दो और ज़ोर से ओह्ह्ह्ह में अब झड़ने वाली हूँ आह्ह्ह्ह ऊहह्ह्ह करके उसने अपनी चूत के पानी से सुरेंद्र  के लंड को नहला दिया, अब सुरेंद्र  ज़ोर ज़ोर से फका फक धक्के देकर उसकी चुदाई किए जा रहा था. मेरा लंड तनकर टाइट था मित्रों.


 मेरा लंड चुत में घुसने को तैयार था मित्रों तभी अचानक से उसके धक्को की स्पीड बढ़ गई और ओह्ह्ह्ह कहते हुए उसके लंड ने परमिला की चूत में फव्वारा छोड़ दिया. उसके बाद परमिला ने मदहोशी में आकर अपनी दोनों आँखे मूंद ली, वो उसकी चुदाई से पूरी संतुष्ट नजर आ रही थी और अब शायद वो इतनी देर चली उस चुदाई की वजह से थोड़ा सा थककर आराम भी करने लगी थी. चुची की चुसाई में क्या मजा है मित्रों.

 मै उसकी चूची  पी रहा था दोस्तों इस तरह हमारा चुदाई का यह सिलसिला ऐसे ही बहुत दिनों तक लगातार चलता रहा और हमने अपनी अदला-बदली करके चुदाई के पूरे पूरे मज़े लिए और उस चुदाई के बाद हम सभी बहुत खुश थे, क्योंकि अब हमारी जोड़ियाँ बनकर पूरी हो चुकी थी और हमें अपनी अपनी मर्जी की चूत और लंड मिल चुका था, क्योंकि यह बात यहीं से उठी थी और यहीं से खत्म हो गई. शरीर की लम्बाई तो एक बहाना था हमे जो चाहिए था वो सब आज हमारे पास था. मेरा लंड ताबड़तोड़ चुदाई के लिए तैयार मित्रों मैंने ऐसी तरह न जाने कितने औरतो और लड़कियों बूर में चोदा पेली किया है कितनो चुत का भोसड़ा तक बना दिया और न जाने कितनो का तो सील तोड़ कर खून निकाल दिया और न जाने कितनी को तो कुवारी में ही माँ बना दिया  और मैं चोदा पेली करने के लिए कही भी और किसी भी हद तक जा सकता हु.

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